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Friday, March 4, 2016

Lonely....

खिड़की से झांकता हूँ मै, 
सबसे नज़र बचा कर 
बेचैन हो रहा हूँ, 
क्यों घर की छत पे आ कर 
क्या ढूँढता हूँ, 
जाने क्या चीज खो गई है, 
इन्सान हूँ, 
शायद मोहब्बत हमको भी हो गई ।

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