खिड़की से झांकता हूँ मै, सबसे नज़र बचा कर बेचैन हो रहा हूँ, क्यों घर की छत पे आ कर क्या ढूँढता हूँ, जाने क्या चीज खो गई है, इन्सान हूँ, शायद मोहब्बत हमको भी हो गई ।
No comments:
Post a Comment