मिलना था इत्तफ़ाक, बिछड़ना नसीब था,
वो इतनी दूर हो गया, जितना करीब था !
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तुमसे मिले ज़माना हुआ फिर भी लगे,
जैसे तुम मिल के गए अभी-अभी !
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दिल को सुकून, रूह को आराम आ गया,
मौत आ गई कि यार का पैग़ाम आ गया !
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फिर मेरी आँख हो गई नमनाक,
फिर किसी ने मिज़ाज पूछा है !
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ऐ काश वो भी ऐसे में आ जाए अचानक,
मौसम बहुत दिनों में सुहाना हुआ तो है...!