जब कभी तू प्यार से मुझे देखा करती
थी….
मुझे तेरी आंखों से आंखे मिलाना अच्छा
लगता था….
जब कभी तू मेरी किसी बात पर हल्के से
मुस्कुरा दिया करती थी….
मुझे तेरी मुस्कान में खो जाना अच्छा
लगता था…
जब कभी मेरे साथ बैठे बैठे तू अपने बालों
को सवारती थी…
उस महौल का तेरे केशुओं की खुशबू से महक
जाना अच्छा लगता था….
जब मैं तेरे दीदार के लिए तरसता था और
तुम रूठ जाती थी…
तब तेरा मुझे छिप छिप कर सताना
अच्छा लगता था….
यू तो आम सा इंसान हूं मेरे अजनबी….
पर तेरा मुझे खास होने का एहसास
दिलाना अच्छा लगता था….
रहे हम दूर हमेशा बन्दिशों के दायरे में….
फिर भी तेरा मुझसे प्यार निभाना
अच्छा लगता था…
सच कह रहा हूं मेरी जान बहुत याद आती
है तेरी…..
मुझे बस तेरे ही साथ अपना वक्त
बिताना अच्छा लगता था….
लौट आ अब तो इन्तजार भी नहीं होता
मुझसे…
तेरे संग मुझे दर्द में भी मुस्कुराना अच्छा
लगता था….
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Wednesday, November 16, 2016
Inspired by my (A) bestfriend's breakup..
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