मैं तुमको मीत बना बैठा, मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा
तू चाहे चंचलता कह ले, तू चाहे दुर्बलता कह ले
दिल ने ज्यों मजबूर किया, मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा
यह प्यार दीये का तेल नहीं, दो-चार दिनों का खेल नहीं
यह तो तलवार की धार है, कोई गुड़ियों का ये खेल नहीं,
मैंने जो भी कोई रेखा खींची, तेरी तस्वीर बना बैठा
मैं चातक हूँ तू बादल है, मैं दीपक हूँ तू काजल है
मैं आँसू हूँ तू आँचल है, मैं प्यासा तू गंगा जल है
जिसने मेरा पता पूछा, मैं तेरा पता बता बैठा
सारा मय खाना घूम गया, प्याले-प्याले को चूम गया
तूने जब घूंघट खोला, मैं बिना पीये ही झूम गया
मुझ को जब भी होश हुआ, मैं तेरा अलख लगा बैठा
तू चाहे दीवाना कह ले, तू चाहे मस्ताना कह ले
तू चाहे पागलपन कह ले, तू चाहे नव सृजन कह ले
मैं बेगाना दीवाना हूँ, जो तुमसे चाहत लगा बैठा
चाहत पर कोई जोर नहीं, दिल में तू है, कोई और नहीं
सब दिल दरवाजे बंद रखे, आँखों के रस्ते समां बैठा
मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा, मैं तुमको मीत बना बैठा
एक दर्द मुझे है सता रहा, दिन-रात मुझे ये रुला रहा
एक प्रेमी दीवाना तेरा, आ जाओ तुम को बुला रहा
कोई अपने दिल को, तेरे हाथों लुटा बैठा
मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा, मैं तुमको मीत बना बैठा !