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Friday, May 24, 2019

आँखें...

वो आँख मिला के आना तेरा,

फिर नज़र झुका के आगे बढ़ जाना ।

अब तू ही बता ऐ हसीं शमां..

इसे क्या समझे ये परवाना...??

Tuesday, April 23, 2019

हाँ... बुरा लगता है!

वो किसी और को सोचे तो बुरा लगता है !
वो किसी और को देखे तो बुरा लगता है !
मेरी आँखों को सिर्फ़ तारीफ़ उसकी चाहिए !
कोई उसको गर अच्छा भी कह दे तो बुरा लगता है !
उसको कोई और अगर देखे तो हो गवारा कैसे !
उसका कोई जो नाम भी ले ले तो बुरा लगता है !
मेरी आँखो में क्या सूरत नहीं दिखती उसको !
अब अगर वो आईना भी देखे तो बुरा लगता है !
उसको कह दो के सर-ए-शाम ना घर से निकले !
साथ साया भी चले उसके तो बुरा लगता है !
चिढ़ सी होती है उसके "हाथ की घड़ी" से मुझे !
हो रही है देर घर जाने में कहती है तो बुरा लगता है !
उससे कहदो के आँखो में ना सुरमा डाले !
उसकी आँखो में कोई और समाये तो बुरा लगता है !
मैंने खोल के रख डाले वर्क सभी दिल के !
फ़िर भी वो हमसे कुछ छुपाये तो बुरा लगता है !!

Friday, February 22, 2019

आँसू

तेरी याद में बरसें तो बरसों बरसें..😭😭
वरना मेरे आंसू ,निकले ना बाहर घर से..

Tuesday, January 8, 2019

हाँ...शोर तो होता है..

मैं अक़्सर उससे कहता हूँ,
तुम शोर बहुत मचाती हो !

फिर वो मुझसे कहती है-

"जब कलाई मेरी तुम पकड़ोगे..
चूड़ी तो मेरी खनकेंगी !
चूड़ी का शोर तो होता है।

जब प्यार से मुझे बुलाओगे..
तब दौड़ के मैं तो आउंगी !
फिर पायल मेरी खनकेगी!
पायल का शोर तो होता है।

जब बिंदिया मेरी चमकेगी..
ये आँखों में तेरी दमकेगी,
ज़ज़्बे फिर शोर मचाएंगे!
जज़्बों का शोर तो होता है..

तुम ज़ुल्फ़ मेरी सुलझाते हुए,
जब ग़ज़रे को बिखराओगे,
तब साँसे मेरी महकेंगी!
साँसों का शोर तो होता है..."



आज उसकी ये मासूमियत भरी बातें सुनके मैं निःशब्द हूँ..।