जब कभी तू प्यार से मुझे देखा करती
थी….
मुझे तेरी आंखों से आंखे मिलाना अच्छा
लगता था….
जब कभी तू मेरी किसी बात पर हल्के से
मुस्कुरा दिया करती थी….
मुझे तेरी मुस्कान में खो जाना अच्छा
लगता था…
जब कभी मेरे साथ बैठे बैठे तू अपने बालों
को सवारती थी…
उस महौल का तेरे केशुओं की खुशबू से महक
जाना अच्छा लगता था….
जब मैं तेरे दीदार के लिए तरसता था और
तुम रूठ जाती थी…
तब तेरा मुझे छिप छिप कर सताना
अच्छा लगता था….
यू तो आम सा इंसान हूं मेरे अजनबी….
पर तेरा मुझे खास होने का एहसास
दिलाना अच्छा लगता था….
रहे हम दूर हमेशा बन्दिशों के दायरे में….
फिर भी तेरा मुझसे प्यार निभाना
अच्छा लगता था…
सच कह रहा हूं मेरी जान बहुत याद आती
है तेरी…..
मुझे बस तेरे ही साथ अपना वक्त
बिताना अच्छा लगता था….
लौट आ अब तो इन्तजार भी नहीं होता
मुझसे…
तेरे संग मुझे दर्द में भी मुस्कुराना अच्छा
लगता था….
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Wednesday, November 16, 2016
Inspired by my (A) bestfriend's breakup..
Friday, July 22, 2016
Proposal
M kbhi dra nhi but teri daant pe drna chahta hu
Kisi ki mohbbt me fsa nhi but teri ashiqi me mrna chahta hu
Kbhi roya nhi but tere hr gm me Rona chahta hu
Kbhi kisi or ko dekha nhi but Teri aankho me khona chahta hu
Tu meri ashiki ka dariya to bn... m tjhme dub jana chahta hu...
Jyda kch nhi chahta tjhse m .. E zindgi ....
Tu bs mera sath de... M apne saato jnm tere sath sath bitana chahta hu.
Kya tum is pagl k sath sath apne saato jnm "waste" krna psnd krogi ...❤💕❣💖
plzzzz...😊😊
Thursday, July 21, 2016
जुलाई 16
पत्थर भी बन जाते हैं फूल... अगर मोहब्बत से उन्हें अपनाओगे, आप आजमा के तो देखो सनम ...आप चोट नहीं सिर्फ वफ़ा की महक ही पाओगे...
Sunday, June 19, 2016
Taarif..
Bahut khubiya h mere yaar me.. Bs whi janta nhi...
Beintehaa mjhse mohbbt h use..bs wo maanta nhi...
Saturday, May 21, 2016
Barish by kumar viswas
लोग कहते हैं मुझे प्यार सिखाना आये,
मैं जो गा दूँ तो वही सारा ज़माना गाये....
फिर भी एक गीत है जो प्राणों में चुपचाप पड़ा,
कई जन्मों से मेरे होंठो पे आना चाहे.....
आखिरी गीत वही मुझसे गवा दे सावन,
इश्क बुझता है इसे कुछ तो हवा दे सावन....
Sunday, May 1, 2016
अन्नदाता की सुनो...
जमीन जल चुकी है,आसमान बाकी है
ऐ दरख्तों तुम्हारा इम्तेहान अभी बाकी है ।
वो जो खेत की मेड पर उदास बैठे हैं
उन्ही की आंखो में ईमान अभी बाकी है ।
पूरे मुल्क को खिलाने के चक्कर में भूखे सो गए जिसके बच्चे
ऊस मजबूर लाचार किसान की जवान बेटी का कन्यादान अभी बाकी है ।
बादलों अब तो बरस आओ सूखी फसलों पर
किसी का मकान गिरवी, तो किसी की अभी लगान बाकी है ।।
Sunday, March 6, 2016
Bhul jaau...???
Kbhi alfaaz bhul jau kabhi khayal bhul
jaau
Tujhe is kadar chahu k apni saans bhul
jau
Uth kar tere paas se jo main chal doon,
To jaate huye khud ko tere paas bhul jaau..
Friday, March 4, 2016
Lonely....
खिड़की से झांकता हूँ मै,
सबसे नज़र बचा कर
बेचैन हो रहा हूँ,
क्यों घर की छत पे आ कर
क्या ढूँढता हूँ,
जाने क्या चीज खो गई है,
इन्सान हूँ,
शायद मोहब्बत हमको भी हो गई ।
Monday, February 22, 2016
????
इतना बता दो कैसे साबित करूँ कि तुम याद आते हो,.
शायरी तुम समझते नहीं
और अदायें हमे आती नहीं...!!
Mohabbate...
मोहब्बत की आजतक बस दो ही बातें अधूरी रही,
इक मै तुझे बता नही पाया
और
दूसरी तू समझ नही पायी..
Saathi...
बीच सफ़र में साथ छोड़ दे
उस साथी की चाह नहीँ
प्रेम हमारा ऐसा हो
जिसकी कोई थाह नहीँ
बाहे जिसकी घर बन जाए
बातें जिसकी खजाना हों
प्यार का इक शब्द उसका
जैसे के नज़राना हो
कर्म धर्म की राह छोड़ दे
उस साथी की चाह नही
प्रेम हमारा ऐसा हो
जिसकी कोई थाह नही
....
Sunday, February 21, 2016
Bachpan
बीत गये बचपन के वो पल
टूट गया वो स्वप्न पुराना,
छूट गया रथ सोने जैसा
छूट गया खुशियों का खजाना।
वाह रे बचपन का वो जमाना
आह रे बचपन का वो जमाना !
वो, नीम कौड़ी की खाट बनाना
वो, उनकी छत से पतंग उड़ाना
तीली से वो धनुष बनाना
सींकों के वो बाण सजाना।
मिट्टी के थे खेल- खिलौने
बिकते थे सब औने पौने,
हुर्र-कबड्डी आइस-पाइस
चार आने में सजे नुमाइश।
गिल्ली- डंडा ओला-पाती
कितनी कोमल चिकनी माटी,
कंचे गोली लत्ती-लट्टू
जीवन का था यही खजाना।
अक्कड़-बक्कड़, चोर सिपाही
चिड़िया उड़ और घघ्घो रानी,
विष-अमृत में मर जी जाना
हांफ-हांफ कर दौड़ लगाना।
पेट लगाकार नल को चलाना
नल के मुंह से मुंह का लगाना,
और घट-घट पानी पीते जाना
जैसे प्यासे को सागर मिल जाना।
सुबह से शादी में सज जाना
शाम से पहले ही थक जाना,
बाराती आने से पहले
दादी पास कहीँ सो जाना।
गौरैया, खांची से फँसाना
भरी धूप डग्गा ढुगराना,
जमीं धूल पर कुछ लिख जाना
चुक्कड़ पर यूं दांत लगाना।
कदम को गिन स्कूल को जाना
छुट्टी पर ही ध्यान लगाना,
कमर पे स्वेटर बांध के आना
चूरन चाट-चाट पछताना।
चियां गिनकर गोट बनाना
कुसली घिसकर शंख बजाना,
नरखे में भूजा गठियाना
भूजकर आलू,राख छुडाना।
पिल्ले का बस कान पकड़ कर
चोर शाह का फर्क बताना,
कानी उंगली से बभनी को
छूकर पूंछ धनी हो जाना।
पूछ न बैठे कठिन पहाड़े
ऐसे नातों से कतराना,
और निकल कर जाते ही बस
बची मिठाई चट कर जाना।
लड़ा के पंजा दम दिखलाना
सांस रोककर खुद अफनाना,
चिक्का,कुश्ती, मार-कलइया
माटी, माथे तिलक लगाना।
बात बात पर अमरख जाना
अंहक अंहक कर दर्द बताना,
मान-मनौव्वल पर इतराना
घर भर से कुट्टी कर जाना।
वाह रे बचपन का वो जमाना
आह रे बचपन का वो जमाना।
Thursday, February 11, 2016
Haal e dil ...2
Wo rutha to mjhse jg chhut jayga...
Uski amaant y dil b tut jayga..
Fir btao e dost...
Mera haal e dil puchhne kon ayga...???
A new starting..
Ek daur tha jb hr koi hmara diwana tha
Hr gli hr mohlle me mera fsaana tha...
Us daur me dekhta hme pura zamaana tha..
But ..
Kya kre yrrr ... Hmara dil b is "pagal" pr hi aana tha..
Sunday, February 7, 2016
Saturday, February 6, 2016
Intehaan-e-mohabbat
"उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे ,
वो मेरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे !
मेरी पलकों से फिसल जाता है चेहरा उसका ,
ये मुसाफ़िर तो कोई और ठिकाना चाहे !
एक "वन फूल" था इस शहर में वो भी न रहा ,
कोई अब किस के लिए लौट के आना चाहे !
हम अपने जिस्म से कुछ इस तरह हुए रुखसत ,
साँस को छोड़ दिया जिस तरफ़ जाना चाहे...!"
Wednesday, January 27, 2016
Some lines of kumar vishwas...
Shohrat Na Ata Karna Maula
Daulat Na Ata Karna Maula
Bas Itna Ata Karna Chahe Jannat Na Ata Karna Maula
Shamma e watan Ki Lau Par Jab Qurbaan Patanga Ho
Hothon Par Ganga Ho, Hathon Mein Tiranga Ho
Bas Ek Sadaan Hi Sune Sada
Barfeeli Mast Hawaon Mein
Bas Ek Dua Hi Uthe Sada
Jalte Tapte Sehraon Mein
Jeete Jee Iska Maan Rakhen
Mar kar Maryaada Yaad Rahe
Hum Rahen Kabhi Na Rahen Magar
Iski Saj Dhaj Aabaad Rahe
Godhra Na Ho Gujrat Na Ho
Insaan Na Nanga Ho
Hothon Par Ganga Ho, Hathon Mein Tiranga Ho...
Wednesday, January 20, 2016
चाह....
ऐसा नहीं कि मुझे आज चाँद चाहिये,
मुझको तो बस तुम्हारे प्यार में विश्वास चाहिये,
न की है कभी भी ख्वाहिश मैंने सितारों की,
ख्वाबों में बस तुम्हारा दीदार चाहिये..
Saturday, January 2, 2016
Betiyaan 2
कन्यादान हुआ जब पूरा,आया समय विदाई का ।।
हँसी ख़ुशी सब काम हुआ था,सारी रस्म अदाई का ।
बेटी के उस कातर स्वर ने,बाबुल को झकझोर दिया।।
पूछ रही थी पापा तुमने,क्या सचमुच में छोड़ दिया।।
अपने आँगन की फुलवारी,मुझको सदा कहा तुमने।।
मेरे रोने को पल भर भी,बिल्कुल नहीं सहा तुमने।।
क्या इस आँगन के कोने में, मेरा कुछ स्थान नहीं।।
अब मेरे रोने का पापा,तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं।।
देखो अन्तिम बार देहरी,लोग मुझे पुजवाते हैं।।
आकर के पापा क्यों इनको,आप नहीं धमकाते हैं।।
नहीं रोकते चाचा ताऊ,भैया से भी आस नहीं।।
ऐसी भी क्या निष्ठुरता है,कोई आता पास नहीं।।
बेटी की बातों को सुन के,पिता नहीं रह सका खड़ा।।
उमड़ पड़े आँखों से आँसू,बदहवास सा दौड़ पड़ा।।
कातर बछिया सी वह बेटी,लिपट पिता से रोती थी।।
जैसे यादों के अक्षर वह,अश्रु बिंदु से धोती थी।।
माँ को लगा गोद से कोई,मानो सब कुछ छीन चला।।
फूल सभी घर की फुलवारी से कोई ज्यों बीन चला।।
छोटा भाई भी कोने में,बैठा बैठा सुबक रहा।।
उसको कौन करेगा चुप अब,वह कोने में दुबक रहा।।
बेटी के जाने पर घर ने,जाने क्या क्या खोया है।।
कभी न रोने वाला बाप,फूट फूट कर रोया है..............