मिलना था इत्तफ़ाक, बिछड़ना नसीब था,
वो इतनी दूर हो गया, जितना करीब था !
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तुमसे मिले ज़माना हुआ फिर भी लगे,
जैसे तुम मिल के गए अभी-अभी !
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दिल को सुकून, रूह को आराम आ गया,
मौत आ गई कि यार का पैग़ाम आ गया !
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फिर मेरी आँख हो गई नमनाक,
फिर किसी ने मिज़ाज पूछा है !
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ऐ काश वो भी ऐसे में आ जाए अचानक,
मौसम बहुत दिनों में सुहाना हुआ तो है...!
कुछ ख़ास है.. कुछ ख़ास है..
तेरे पास होने का जो एहसास है..
हाँ.. कुछ खास है..
तू पास है.. मेरे आसपास है..
कुछ ख़ास है..
एहसास है..
तेरे मेरे बीच में जो होती बतियाँ..
याद करूँ तुझको तू जगाये रतियाँ..
आजा पास अब तू ओ मेरी तू प्रिया..
तुझसे मिलने को तरसे ये जिया..
कुछ खास है..
एहसास है...!
उनको तो हमसे प्यार था
यह कल की बात है
कायम यह ऐतबार था
यह कल की बात है
जब मिली थी नज़र
तो चलता नहीं था बस
मुझे दिल पर अख्तियार ना था
यह कल की बात है !
अब फूल भी चुभने लगा है निगाहों में
काँटों से मुझको तब प्यार था
यह कल की ही बात है
अब जिनकी बेवफ़ाई के चर्चे हैं हर तरफ
वे पहले वफादार थे
यह कल की ही बात है
जिसने लगाई आग
मेरे घर में आकर
वह शख्स मेरा यार था
यह कल की ही बात है
तन्हाईयों का गम
जो मुझे दे दिया उन्होंने
वह मेरा गम बेशुमार है
यह कल की ही तो बात है !
ये रात ये तन्हाई
ये दिल के धड़कने की आवाज़
ये सन्नाटा
ये डूबते तारों की
खा़मोश गज़ल रवानी
ये वक्त की पलकों पर
सोती हुई वीरानी
जज्बा़त ए मुहब्बत की
ये आखिरी अंगड़ाई
बजाती हुई हर जानिब
ये मौत की शहनाई
सब तुम को बुलाते हैं
पल भर को तुम आ जाओ
बंद होती मेरी आँखों में
मुहब्बत का एक ख्वाब़ सजा जाओ