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Wednesday, February 9, 2022

कोरोना (corona)

 पहले सी अब दिखती नहीं वे रौनकें बाजार की


पहले सी अब दिखती नहीं हैं
रौनकें बाजार की.

हर ओर सन्नाटा यहां
हर रोज बढ़ते फासले
हर रोज मौतें बढ़ रहीं
हर ओर दुख के काफिले

कैसी महामारी चली
धुन थम गयी संसार की.

वे वक्त के मजदूर हैं
पर वक्त से मजबूर हैं
ताले लगे, रस्ते रुके
जाएं कहां वे दूर हैं

सुनता कहां मालिक भला
चीखें यहां लाचार की.

है पीठ पर गठरी लदी
औ कांध पर बच्चे लदे
जाना है मीलों दूर तक
पर प्राण फंदों में फँदे

है जान सांसत में पड़ी
खुद ही यहां सरकार की.

कैसा भयंकर वायरस !
जीवन हुआ इससे विरस
हर शख़्स संक्रामक हुआ
वर्जित हुआ उसका परस

बस मास्क में महफूज है
सांसें सकल संसार की.

संदिग्ध है हर छींक तक
संगीन है वातावरण
अस्पृश्यता ने हर लिया
है सभ्यता का आवरण

चूलें एकाएक हिल उठीं
अस्तित्व के दीवार की .

है चीन से फैला जहर
ईरान पर बरपा कहर
इटली बना शमशान है
बज उठा यू.एस में बजर

संभावनाएं क्षीण हैं
इस व्याधि के उपचार की.

ठप हुए उत्पादन सभी
चुक रहे संसाधन सभी
शेयर सभी लुढ़के पड़े
बेअसर आवाहन सभी

मंदी ने तोड़ी है कमर
दुनिया के कारोबार की.
***

तेज़ाब

 लोग कहते हैं शर्म और लाज़ तो

लड़कियों का गहना है।
मैं भी अपनी इज्ज़त ढ़ककर चला करती थी।
सीने पर लंबा सा दुपट्टा और सिर से पैर तक
खुदको ढका करती थी।*

पर उस रोज इस एक सच से
मैं वाकिफ हुई ,
की लड़कियों को कभी भी
किसी लड़के को
“ना”कहने का अधिकार नहीं।

उस दिन उस शख्स ने मुझसे
अचानक रास्ते में मुलाकात की,
उसने खिंचा, मेरा दुपट्टा और
बड़ी ही बत्तमीजी से मुझसे बात की।
मनो उसदिन ऐसे लगा ,
अगर शर्म और लाज़ की जगह मुझे घर वालों ने,
बहादुरी और हिम्मत की गहने पहनाये होते तो,
बड़ा ही मुंह तोड़ मैं इसे जवाब देती ।

पर थोड़ी बहादुर और लड़ाकू तो मैं
बचपन से ही थी।
कभी घर वालों के कानूनों का विरोध करती,
तो कभी दायरों से बाहर जाकर,
कुछ अलग करने की कोशिश करती।

और उस रोज उस शख्स को मैंने,
उसी हिम्मत के साथ पलटकर जवाब दिया।
थप्पड़ मारा और कहा,
शर्म तुझे आनी चाहिए ,मुझे नहीं ।
लड़की हूं मैं,रूह है मेरी भी।
मैं सिर्फ जिस्म का टुकड़ा नहीं।
जो सरेआम तुम मेरी इज्जत
नीलाम कर रहे हो।
सुधर जाओ, अब भी कुछ बिगड़ा नहीं।

शायद मेरी इस बात का उस पर,
ज्यादा ही असर हो चला था।
इश्क में डूबा हूं कहता है जो वह लड़का,
मुझे फिर उसी रास्ते में मिला था।

*पर इस बार मेरी बहादुरी के बदले ,
उसके भीतर प्रतिशोध की अग्नि जल रही थी।
नहलाकर चला गया वो मुझे तेजाब मे,
मेरे चेहरे पर मेरे हिम्मत के ही धब्बे लिखे थे।*

बेरंग सी दुनिया फिर मेरी हो गई।
आज समझ आया कि इस समाज के
दायरों को लांघना क्या होता है।
किसी लड़के को
“ना” कहना क्या होता है।

आज समझ आया कि
मेरा पलटकर हिम्मत दिखाना,
मुझे बर्बाद भी कर सकता है,और
उस लड़के के अहंकार को,
और आबाद भी कर सकता है।

और लोग कहते हैं
शर्म और लाज़ तो
लड़कियों का गहना है…..

Friday, May 24, 2019

आँखें...

वो आँख मिला के आना तेरा,

फिर नज़र झुका के आगे बढ़ जाना ।

अब तू ही बता ऐ हसीं शमां..

इसे क्या समझे ये परवाना...??

Tuesday, April 23, 2019

हाँ... बुरा लगता है!

वो किसी और को सोचे तो बुरा लगता है !
वो किसी और को देखे तो बुरा लगता है !
मेरी आँखों को सिर्फ़ तारीफ़ उसकी चाहिए !
कोई उसको गर अच्छा भी कह दे तो बुरा लगता है !
उसको कोई और अगर देखे तो हो गवारा कैसे !
उसका कोई जो नाम भी ले ले तो बुरा लगता है !
मेरी आँखो में क्या सूरत नहीं दिखती उसको !
अब अगर वो आईना भी देखे तो बुरा लगता है !
उसको कह दो के सर-ए-शाम ना घर से निकले !
साथ साया भी चले उसके तो बुरा लगता है !
चिढ़ सी होती है उसके "हाथ की घड़ी" से मुझे !
हो रही है देर घर जाने में कहती है तो बुरा लगता है !
उससे कहदो के आँखो में ना सुरमा डाले !
उसकी आँखो में कोई और समाये तो बुरा लगता है !
मैंने खोल के रख डाले वर्क सभी दिल के !
फ़िर भी वो हमसे कुछ छुपाये तो बुरा लगता है !!

Friday, February 22, 2019

आँसू

तेरी याद में बरसें तो बरसों बरसें..😭😭
वरना मेरे आंसू ,निकले ना बाहर घर से..

Tuesday, January 8, 2019

हाँ...शोर तो होता है..

मैं अक़्सर उससे कहता हूँ,
तुम शोर बहुत मचाती हो !

फिर वो मुझसे कहती है-

"जब कलाई मेरी तुम पकड़ोगे..
चूड़ी तो मेरी खनकेंगी !
चूड़ी का शोर तो होता है।

जब प्यार से मुझे बुलाओगे..
तब दौड़ के मैं तो आउंगी !
फिर पायल मेरी खनकेगी!
पायल का शोर तो होता है।

जब बिंदिया मेरी चमकेगी..
ये आँखों में तेरी दमकेगी,
ज़ज़्बे फिर शोर मचाएंगे!
जज़्बों का शोर तो होता है..

तुम ज़ुल्फ़ मेरी सुलझाते हुए,
जब ग़ज़रे को बिखराओगे,
तब साँसे मेरी महकेंगी!
साँसों का शोर तो होता है..."



आज उसकी ये मासूमियत भरी बातें सुनके मैं निःशब्द हूँ..।

Wednesday, November 8, 2017

Padmavati

सुंदरता खुद जिससे मिलकर,
सुंदरतम हो आई थी।
जिसके मन मंदिर में अपने,
पिय की शक्ल समाई थी।

शील, पतिव्रत की दुनिया को,
जिसने सीख सिखाई थी।
जौहर की ज्वाला में जलकर,
जिसने जान लुटाई थी।

सदियों के गौरव को जिसने,
अम्बर तक पहुंचाया था।
स्वाभिमान को शक्ति देकर,
खिलजी से भिड़वाया था।

जीते जी राणा को चाहा,
और चाह ना उसकी थी।
सत-पथ पे चलती थी हरदम,
सत पे जीती मरती थी।

चित्तौड़ दुर्ग की वह महारानी,
रति से सुंदर दिखती थीं।
उर्वशी, रम्भा सी परियां,
नहीं एक पल टिकती थीं।

कामदेव भी जिसे देखकर,
विचलित सा हो जाता था।
अलाउद्दीन खिलजी उसको ही,
हुरम बनाना चाहता था।

पर वो  बेटी भारत की थी,
प्रण की बड़ी पुजारी थी।
पति के सिवा उसे दुनिया में,
कोई चीज न प्यारी थी।

खिलजी की तो उस पदमण पर,
परछाई भी नहीं पड़ी।
लाज बचाने के खातिर वो,
अग्निकुंड में कूद पड़ी।

मर के अमर हुई महारानी,
तीर्थ बनी चित्तौड़ धरा।
उज्ज्वल क्षत्री वंश हुआ
और राजस्थानी वसुंधरा।

स्वाभिमान की अमिट कहानी,
जन-जन के मन भाती है।
हिन्द देश की शौर्य-पताका,
बन रानी लहराती है।

उसको कामी खिलजी की ये,
आज प्रेमिका कहते हैं।
हैरत है ये अर्थपुजारी,
इस भारत में रहते हैं।

जिनका धर्म इमां पैसा है,
वे क्या जाने मर्यादा।
पैसा लेकर जहां प्यार को,
कर लेते आधा आधा।

राजस्थानी कुल-कानी को,
समझे ऐसी सोच कहाँ।
प्रगतिवाद के इन पुतलों में,
मानवता का लोच कहाँ।

गर इतिहास हुआ खंडित तो,
पीछे क्या बच पाएगा।
संस्कृति का अमृत निर्झर,
जहर सना हो जाएगा।

हर गौरव की थाती को ये,
मनोविनोदी ले लेंगे।
और उसे विकृत कर करके,
फिल्मकहानी गढ़ लेंगे।

अब पानी सर पर है आया,
उठ पतवार संभालो तुम।
डूब न जाए अर्थ-समंद में,
ये इतिहास बचालो तुम।

ऐ भारत के सजग युवाओ!
इक रानी की बात नहीं।
पन्ना, जोधा पदमावत को,
फिल्माने की बात नहीं।

बात सिर्फ है स्वाभिमान की,
सत्य सनातन वो ज्योती।
उसपे घात करे कोई तो,
हमसे सहन नहीं होती।

Wednesday, November 1, 2017

यादें ... फिर से...

........****मेरी कलम से*****.....

ऐसा लगता है जैसे कल की ही बात है जब वो चुपके से पास मेरे आया करती थी,
जबकि बर्षों गुजर गए जब वो आकर बाहों में मेरी सिमट जाया करती थी।

क्या थी उसकी मजबूरी जो उसने यूँ बीच राह छोड़ दिया हमको,
जो कभी हर कदम साथ मेरे बढ़ाया करती थी,

लाखों कोशिश करता हूँ मैं उसे भुलाने की पर भूल नहीं पाता उसकी वो हँसी,
जब दिऐ *दीवाली* के जलाकर वो खिलखिलाया करती थी।

कैसे भुलाऊँ सर्दियों की सुबहें जब बैठकर सीढ़ियों पर मंदिर की,
वो कसमें प्यार की खाया करती थी।

इतनी उदास है जिंदगी की पता ही नही लगता खुशियाँ हैं भी या नही है जिंदगी में,
दौर वही याद आता है जब वो सिर रखकर अपना मेरे सीने पर सो जाया करती थी।

तू ही बता दे ऐ रब मेरे कैसे मिटायूं उस मंजर को अपनी इन आंखों से,
जब वो दूर से बाहें फैलाकर "मानस" को बुलाया करती थी।।

Wednesday, July 19, 2017

Bhav taarif

Awsm eyes...
ये निगाहों का क़सूर है या क़सूर है तेरी अदाओं का,
लाखों मर चुके हैं और लाखों का मरना बाकी है...

Saturday, June 24, 2017

Bhav...

Usne Aakhri mulaqat karke meri zindagi ki raat kardi..

Abhi thik se usko jana bhi nhi tha ki usne jane ki baat krdi,

Jise naaz tha gurbat pe meri...
Usne shaan paiso ki dikha kar zahir meri aukaat kardi.

Jiske Lhje me sirf hum tum hua karte the...
Aaj usne sharminda mujhe puch kr meri zaat kardi..

Jiski chahat me maine zamana chhoda..

Aaj usne mujhe chhod kar whi siyasat mere saath kardi..

Tuesday, March 7, 2017

Khyal-e-zindgi

ज़ख्मों के साथ जोखिम नहीं लेने चाहिए

पुरानी यादों के रहते नये खयालात नहीं बनाने चाहिए।

दिल लगाना सिर्फ दिल्लगी नहीं होती ऐ हमदम ,

महबूब की बेवफाई को अपनाना भी आना चाहिए...

Wednesday, November 16, 2016

Inspired by my (A) bestfriend's breakup..

जब कभी तू प्यार से मुझे देखा करती
थी….
मुझे तेरी आंखों से आंखे मिलाना अच्छा
लगता था….
जब कभी तू मेरी किसी बात पर हल्के से
मुस्कुरा दिया करती थी….
मुझे तेरी मुस्कान में खो जाना अच्छा
लगता था…
जब कभी मेरे साथ बैठे बैठे तू अपने बालों
को सवारती थी…
उस महौल का तेरे केशुओं की खुशबू से महक
जाना अच्छा लगता था….
जब मैं तेरे दीदार के लिए तरसता था और
तुम रूठ जाती थी…
तब तेरा मुझे छिप छिप कर सताना
अच्छा लगता था….
यू तो आम सा इंसान हूं मेरे अजनबी….
पर तेरा मुझे खास होने का एहसास
दिलाना अच्छा लगता था….
रहे हम दूर हमेशा बन्दिशों के दायरे में….
फिर भी तेरा मुझसे प्यार निभाना
अच्छा लगता था…
सच कह रहा हूं मेरी जान बहुत याद आती
है तेरी…..
मुझे बस तेरे ही साथ अपना वक्त
बिताना अच्छा लगता था….
लौट आ अब तो इन्तजार भी नहीं होता
मुझसे…
तेरे संग मुझे दर्द में भी मुस्कुराना अच्छा
लगता था….

Friday, July 22, 2016

Proposal

M kbhi dra nhi but teri daant pe drna chahta hu

Kisi ki mohbbt me fsa nhi but teri ashiqi me mrna chahta hu

Kbhi roya nhi but tere hr gm me Rona chahta hu

Kbhi kisi or ko dekha nhi but Teri aankho me khona chahta hu

Tu meri ashiki ka dariya to bn... m tjhme dub jana chahta hu...

Jyda kch nhi chahta tjhse m .. E zindgi ....
Tu bs mera sath de... M apne saato jnm tere sath sath bitana chahta hu.

Kya tum is pagl k sath sath apne saato jnm "waste" krna psnd krogi ...❤💕❣💖

plzzzz...😊😊

Thursday, July 21, 2016

जुलाई 16

पत्थर भी बन जाते हैं फूल... अगर मोहब्बत से उन्हें अपनाओगे, आप आजमा के तो देखो सनम ...आप चोट नहीं सिर्फ वफ़ा की महक ही पाओगे...

Sunday, June 19, 2016

Taarif..

Bahut khubiya h mere yaar me.. Bs whi janta nhi...

Beintehaa mjhse mohbbt h use..bs wo maanta nhi...