मैं अक़्सर उससे कहता हूँ,
तुम शोर बहुत मचाती हो !
फिर वो मुझसे कहती है-
"जब कलाई मेरी तुम पकड़ोगे..
चूड़ी तो मेरी खनकेंगी !
चूड़ी का शोर तो होता है।
जब प्यार से मुझे बुलाओगे..
तब दौड़ के मैं तो आउंगी !
फिर पायल मेरी खनकेगी!
पायल का शोर तो होता है।
जब बिंदिया मेरी चमकेगी..
ये आँखों में तेरी दमकेगी,
ज़ज़्बे फिर शोर मचाएंगे!
जज़्बों का शोर तो होता है..
तुम ज़ुल्फ़ मेरी सुलझाते हुए,
जब ग़ज़रे को बिखराओगे,
तब साँसे मेरी महकेंगी!
साँसों का शोर तो होता है..."
तुम शोर बहुत मचाती हो !
फिर वो मुझसे कहती है-
"जब कलाई मेरी तुम पकड़ोगे..
चूड़ी तो मेरी खनकेंगी !
चूड़ी का शोर तो होता है।
जब प्यार से मुझे बुलाओगे..
तब दौड़ के मैं तो आउंगी !
फिर पायल मेरी खनकेगी!
पायल का शोर तो होता है।
जब बिंदिया मेरी चमकेगी..
ये आँखों में तेरी दमकेगी,
ज़ज़्बे फिर शोर मचाएंगे!
जज़्बों का शोर तो होता है..
तुम ज़ुल्फ़ मेरी सुलझाते हुए,
जब ग़ज़रे को बिखराओगे,
तब साँसे मेरी महकेंगी!
साँसों का शोर तो होता है..."
