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Tuesday, June 10, 2014

pyar kise kahte hain...???

नज़र मुझसे मिलाती हो तो तुम शरमा-सी जाती हो,
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
जबाँ ख़ामोश है लेकिन निग़ाहें बात करती हैं
अदाएँ लाख भी रोको, अदाएँ बात करती हैं।
नज़र नीची किए दाँतों में लबों को दबाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
छुपाने से मेरी जानम कहीं क्या प्यार छुपता है,
ये ऐसा मुश्क है, ख़ुशबू हमेशा देता रहता है।
तुम तो सब जानती हो फिर भी क्यों मुझको सताती हो?
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारे प्यार का ऐसे हमें इज़हार मिलता है,
हमारा नाम सुनते ही तुम्हारा रंग खिलता है,
और फिर साज़-ए-दिल पे तुम हमारे गीत गाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।
तुम्हारे घर में जब आऊँ तो छुप जाती हो परदे में,
मुझे जब देख ना पाओ तो घबराती हो परदे में,
ख़ुद ही चिलमन उठा कर फिर इशारों से बुलाती हो।
इसी को प्यार कहते हैं, इसी को प्यार कहते हैं।

''प्रीत'' with ''मीत''

मैं तुमको मीत बना बैठा, मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा
तू चाहे चंचलता कह ले, तू चाहे दुर्बलता कह ले
दिल ने ज्यों मजबूर किया, मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा
यह प्यार दीये का तेल नहीं, दो-चार दिनों का खेल नहीं
यह तो तलवार की धार है, कोई गुड़ियों का ये खेल नहीं,
मैंने जो भी कोई रेखा खींची, तेरी तस्वीर बना बैठा
मैं चातक हूँ तू बादल है, मैं दीपक हूँ तू काजल है
मैं आँसू हूँ तू आँचल है, मैं प्यासा तू गंगा जल है
जिसने मेरा पता पूछा, मैं तेरा पता बता बैठा
सारा मय खाना घूम गया, प्याले-प्याले को चूम गया
तूने जब घूंघट खोला, मैं बिना पीये ही झूम गया
मुझ को जब भी होश हुआ, मैं तेरा अलख लगा बैठा
तू चाहे दीवाना कह ले, तू चाहे मस्ताना कह ले
तू चाहे पागलपन कह ले, तू चाहे नव सृजन कह ले
मैं बेगाना दीवाना हूँ, जो तुमसे चाहत लगा बैठा
चाहत पर कोई जोर नहीं, दिल में तू है, कोई और नहीं
सब दिल दरवाजे बंद रखे, आँखों के रस्ते समां बैठा
मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा, मैं तुमको मीत बना बैठा
एक दर्द मुझे है सता रहा, दिन-रात मुझे ये रुला रहा
एक प्रेमी दीवाना तेरा, आ जाओ तुम को बुला रहा
कोई अपने दिल को, तेरे हाथों लुटा बैठा
मैं तुमसे प्रीत लगा बैठा, मैं तुमको मीत बना बैठा !

Armaan se intzar

अरमान था तेरे साथ जिंदगी बिताने का,

शिकवा है खुद के खामोश रह जाने का, 

दीवानगी इस से बढकर और क्या होगी,

 आज भी इंतजार है तेरे आने का !!

Bhulne wale se koi kah de....

भूलने वाले से कोई कह दे ज़रा
इस तरह याद आने से क्या फ़ायदा 

जब मेरे दिल की दुनिया बसाती नहीं
फिर ख्यालों में आने से क्या फ़ायदा 

क्या कहूँ आपसे कितनी उम्मीदें थी
आप क्या बदले, दुनिया बदल सी गई 

आसरा दे के दिल तोड़ते हैं मेरा
इस तरह सताने से क्या फ़ायदा 

चार तिनके जला के क्या मिल गया
मिट सका ना ज़माने से मेरा निशान 

मुझ पे बिजली गिराओ तो जानू सही
आशियाने पे गिराने से क्या फ़ायदा...